गाय को माता मानने वाले भारत मे गौमाता की दुर्गति क्यों।

फरीदाबाद।बी डी कौशिक मुख्य संपादक मातृभूमि संदेश न्यूज नेटवर्क।


भारत वर्ष में सदा से गौ माता वंदनीय और पूजनीय रही है हमेशा क्षत्रियों ने गौ और ब्राह्मण की रक्षा का वचन दिया है और गौ माता के रक्षण हेतू अपनी जान तक दी है भगवान परशुराम जी के पिता महर्षि जमदग्नि ने तो कामधेनु के लिये अपना सर तक बलिदान दे दिया। वहीं महर्षि वशिष्ठ ने गौ माता के लिए अपने सौ पुत्रों का बलिदान तक दे दिया यहां तक कि सिखों के दशवें गुरु गुरु गोविंद सिंह ने भी धर्म और गौ रक्षा के सर्वस्व लुटा दिया।हमारा इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है जब राजाओं और ऋषि मुनियों ने गौ की रक्षा के लिये अपना सब कुछ लुटा दिया।
भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण ने तो गौ माता की रक्षा का वचन तक दिया था और इसी लिये पृथ्वी पर अवतार लिया।
उन्ही राम और कृष्ण की धरती पर गौ वंश की ऐसी दुर्दशा देखकर दिल तार तार हो गया है गौ माताओं की तड़फ तड़फ कर होती मौतों को देखकर लगता है इस दुनियां का अंत नजदीक है जिधर नजर दौड़ाइए उधर ही दर्द से तड़पती और कराहती दम तौड़ती गाय नजर आती है ऐसी भयावह दशा देखकर लगता है कि हमारे से तो वो पश्चिमी देश ही अच्छे हैं जो उसे पूजते तो नहीं अपितु पालते तो ढंग से हैं और नां ही ऐसी दुर्दशा भी नहीं करते।
अपने आपको हिंदू की हितैषी कहने वाली सरकार और गौ माता के नाम पर करोड़ों रुपए डकारने वाला मंत्रालय आखिर क्यों चुप हैं गौ माता के नाम पर लाखों करोड़ों रुपए कमाने वाले बाबा,संत मंहत आखिर क्यूं आवाज नहीं उठाते ।जब कोरोना की वैक्सीन बन सकती है तो लम्पी वाईरस की क्यों नहीं। कहीं गौ माता की ये भयंकर दुर्दशा किसी अनिष्ट की आशंका का संकेत तो नहीं।भारत के कर्णधार मोदी जी क्या इस विषय पर विचार करेंगे।