मुख्यमंत्री भगवंत मान को क्या फ्रैंकफर्ट मे लुफ्थांसा की फ्लाइट से उतारा गया ?


नई दिल्ली।बी डी कौशिक मुख्य संपादक मातृभूमि संदेश न्यूज नेटवर्क।
कोई भी संवैधानिक पद हो उसकी एक गरिमा होती है देश या विदेश में उसकी गरिमा बनाये रखना उस व्यक्ति की जो उसे संभाल रहा है उसकी जिम्मेदारी होती है। परंतु अगर वही व्यक्ति नशे में चूर होकर इतना मदमस्त हो जाये कि वो खड़ा भी ना रह पाए तो क्या किया जाये।जी हां हमारे पंजाब के माननीय मुख्यमंत्री भगवंत मान विदेशी निवेशकों को पंजाब में निवेश करने के लिए विदेश में कई देशों के दौरे पर थे अंतिम दिन वो जर्मनी में थे जहां से उन्हें भारत के लिए लुफ्थांसा एयरवेज की फ्लाइट पकड़नी थी वो जैसे ही अपने अमले के साथ जहाज में चढ़े उनके नशे में हालात ये थे कि वो खड़े भी नहीं हो रहे थे जिससे एयरवेज स्टाफ ने उन्हें जहाज से नीचे उतार दिये और जब दारु उतर जाये तब दूसरी फ्लाईट पकड़ने की सलाह दी।इस दौरे में उनके साथ उनकी धर्मपत्नी और सुरक्षाकर्मी और स्टाफ भी था सबको जिल्लत का सामना करना पड़ा।इससे पहले भी कई बार उनकी छिछालेदार नशे के कारण हो चुकी है वो कई बार दारु के नशे में धुत होकर संसद और सांसद दोनों की गरिमा को ठेस पहुंचा चुके हैं क्या मुख्यमंत्री केजरीवाल बतायेंगे कि एक नशेड़ी जो नशे में चूर होकर खुद को नां संभाल सके क्या वो प्रदेश सरकार को संभाल पायेगा।पूरे पंजाब में क्या कोई ऐसा आप नेता नहीं है जो प्रदेश को संभाल सके।इस तरह के अशोभनीय व्यवहार से ना सिर्फ मुख्यमंत्री जैसे सम्मानित पद अपितु भारत की छवि भी खराब होती है आप पार्टी को इस पर विचार अवश्य करना चाहिए।