क्या वो सचमुच राजा श्री राम का उत्तराधिकारी है।

 

 

फरीदाबाद।बी डी कौशिक मुख्य संपादक मातृभूमि संदेश न्यूज नेटवर्क। साल 2000 का समय था केशुभाई पटेल गुजरात सरकार को ठीक से चला नहीं पा रहे थे, लोगों में और पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा था।
जय
इसी बीच जनवरी 2001 में गुजरात में अब तक का सबसे भीषण भूकंप आया और लगभग 20 हज़ार लोगों को अपने प्राण गँवाने पड़े, गुजरात घोर निराशा में डूबा हुआ था।

तब स्व. अटलबिहारी वाजपेयी जी ने एक अनजाने, गुमनाम से आदमी को संगठन से निकालकर गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया, ये अक्टूबर 2001 की बात है।

लेकिन उस आदमी ने हिम्मत नहीं हारी उसने गुजरात को फिर से बनाने में दिन रात एक कर दिया इसके बाद गोधरा कांड हुआ और उसकी परिणीति में गुजरात मे भीषण दंगे हुए, इन दंगों में 1000 से ज़्यादा लोग मारे गए और जान माल का नुकसान हुआ। इसे लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा मचाया। कुछ सांसदों, तथाकथित बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, फिल्मकारों ने बाक़ायदा अमेरिका को चिठ्ठी लिखी कि इस व्यक्ति को अमेरिका में ना आने दिया जाए।

देखते ही देखते 2002 के चुनाव आ गए और गुजरात की जनता ने इस आदमी पर भरोसा करते हुए फिर से गुजरात की बागडोर संभालने को दे दी।

इन्हीं दंगों में उसने वो कर दिखाया कि वो देश के हर तथाकथित सेकुलर पार्टी, नेता, दलाल पत्रकारों, दलाल अखबारों, न्यूज़ चैनलों की आँखों की किरकिरी बन गया। उसे मारने के भी कई बार प्रयास हुए और जब गुजरात पुलिस ने उन आतंकियों का एनकाउंटर किया तो आतंकियों के मरने पर रोने वाली एक पार्टी की नेता ने उसे बहुत परेशान किया, उसके एक गृहमंत्री को जेल में डाल दिया स्वयं उसे मुख्यमंत्री होते हुए सीबीआई दफ्तर में घंटों बिठाकर पूछताछ की, परंतु उसने कभी पलटकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

ना उसने किसी की परवाह की, वो गुजरात को और बेहतर बनाने में जुटा रहा। उसके काम करने का तरीका भी अजीबोगरीब था। किसी भी बड़े प्रोजेक्ट का शिलान्यास करते समय वो पूरी जानकारी ले लेता कि ये कब तक पूरा होगा, इसकी क्या क्या विशेषता होगी।

इसके बाद वो प्रोजेक्ट पूरा होने की ‘डेडलाइन’ से कुछ महीनों पहले से ही रेडियो और अखबारों में विज्ञापन देना शुरू कर देता कि फलाँ तारीख को मैं इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन करूँगा। सारा सरकारी अमला, अधिकारी, इंजीनियर, ठेकेदार उसे समय पर पूरा करने में जुट जाते और उसमें भी क्वालिटी से कोई समझौता सहन नहीं था।

उसकी साफ सुथरी छवि गुजरातियों के मन को मोहती चली गई और वो एक के बाद एक लगातार तीन बार गुजरात का मुख्यमंत्री बना।

साल 2013 में उसे पार्टी ने अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित कर दिया। यहाँ भी उसने परिश्रम की पराकाष्ठा को पार करते हुए मई 2014 में अपनी पार्टी को पहली बार पूर्ण बहुमत दिलवाया और देश में लंबे समय बाद अब एक पार्टी की सरकार थी, “बैसाखियों” के भरोसे वाली सरकार नहीं थी।

मुख्यमंत्री बनने के बाद वो पहली बार विधानसभा पहुँचा था और ऐसे ही सीधा प्रधानमंत्री बनकर संसद भवन में आया था। पहली बार संसद भवन में प्रवेश करने से पूर्व संसद की सीढ़ियों को साष्टांग दंडवत करने का वो दृश्य आजतक देश की जनता को याद है। ऐसा करने वाला वो देश का पहला प्रधानमंत्री था।

उसकी पार्टी के घोषणापत्र में दो मुख्य बिंदुओं का हमेशा उल्लेख रहता था – धारा 370 हटाना और राम मंदिर का निर्माण करना।

वर्षों से जो पार्टी सत्ता में रही उसने राम मंदिर के फैसले को हमेशा लटकाए रखा और उसकी पार्टी पर तंज कसते रही ‘मंदिर वहीं बनाएंगे लेकिन तारीख नहीं बताएंगे’

लेकिन राम को काल्पनिक बताने वाली वो पार्टी नहीं जानती थी कि प्रभु श्री राम को भी सुयोग्य उत्तराधिकारी की खोज थी और वो उसी के हाथों सब कुछ करवाना चाहते थे।

काले धन पर प्रहार करने के लिए उसने नोटबंदी जैसा ऐतिहासिक कदम उठाया और पूरे देश को नोट बदलवाने के लिए बैकों की लाइन में लगवा दिया। विपक्ष ने उस पर खूब तंज कसे, गालियाँ दीं, झूठे आरोप लगाए लेकिन वो टस से मस ना हुआ।

गुजरात की ही तरह मई 2019 में देश की जनता ने उस पर पुनः विश्वास जताया और पहले से भी ज़्यादा सीटें देकर दुबारा भारत का प्रधानमंत्री बनाया।

इस बार वो पूरी तैयारी से था और उसने आते से ही अगस्त 2019 के मॉनसून सत्र में धारा 370 और 35 A को हटा दिया और इसके लिये जो योजना उसने बनाई थी उसके बारे में किसी ने सोचा तक नहीं था।

सांसदों का प्रतिनिधि मंडल बनाकर विदेश भेजने की वर्षों पुरानी एक (कु) प्रथा चली आ रही थी उसने इसी को प्रयोग किया। राज्यसभा के विपक्ष के अधिकांश सांसदों एक प्रतिनिधि मंडल उसने ‘जल संग्रहण’ पर जानकारी जुटाने, अध्ययन करने विदेश भेज दिया।

इसके बाद धारा 370 हटाने का बिल सबसे पहले राज्यसभा में लाया गया और विपक्ष को पूरा विश्वास था कि ये बिल यहीं औंधे मुँह गिर जाएगा, लोकसभा में जाने का काम ही नहीं रहेगा लेकिन बिल आने के बाद जब नेता विपक्ष ने पीछे मुड़कर देखा तो उसके सांसद नदारद थे वो तो जल संग्रहण पर अध्ययन करने (!!) विदेश गए हुए थे।

बिल राज्यसभा में पास हो गया और लोकसभा में तो होना ही था क्योंकि वहाँ बहुमत था। विपक्ष के तमाम नेताओं के होश उड़ गए क्योंकि वो तो पानी पी पीकर कसमें खाते थे कि इस देश से धारा 370 कभी हट ही नहीं सकती है।

इसके बाद उसने एक बार सुप्रीम कोर्ट का दौरा किया और उसके थोड़े ही दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि राम मंदिर मामले की सुनवाई अब रोज़ होगी और लगभग 50 दिनों तक सुनवाई करने के पश्चात सुप्रीमकोर्ट ने अक्टूबर 2019 में हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाया और पूरे देश में ‘जय श्रीराम’ की धूम मच गई, लोगों की आँखों से अश्रुधारा बह निकली।

सिर्फ देश ही नहीं विदेशों में भी उसने देश का लोहा मनवाना शुरू कर दिया, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को सीधा बराक कहकर बुलाया, चीन के राष्ट्रपति को झूला झुलाया, जापान के राष्ट्रपति को गंगा आरती में बुलाया।

साल 2020 में जब पूरा विश्व को रोना महामारी की चपेट में आया तो उसने फिर से ऐतिहासिक फैसला लेते हुए देश में लॉक डाउन लगा दिया और लगभग दो महीनों तक पूरे देश को उनकी सुरक्षा के लिये घरों में कैद कर दिया। विपक्ष इस समय भी अपनी घटिया हरकतों से नहीं चूका और गाहे बगाहे देश की जनता को भड़काने के तमाम प्रयास करता रहा।

थोड़ी राहत मिलने पर उसने छूट दी लेकिन कुछ ही महीनों बाद को रोना की दूसरी लहर घातक सिद्ध हुई और देश में हाहाकार मच गया। उसकी खूब आलोचना हुई, वो चिंतित और थोड़ा विचलित भी हुआ लेकिन संकटों से पार पाना उसे भली भांति मालूम है। विपक्ष ने इस बार भी लोगों की प्राणों की परवाह नहीं की और उसे बदनाम करने के हरसंभव प्रयास किये।

इन सबसे उबरते हुए उसने वैक्सीन बनाने पर ज़ोर दिया और जब दुनियाभर के तमाम विकसित देश भी वैक्सीन बनाने में नाकाम हो रहे थे, विदेशी कंपनियाँ मुहमाँगे दाम माँग रही थीं तब उसने देश में ही वैक्सीन विकसित करने पर ज़ोर दिया स्वयं एक ही दिन में तीन लैबोरेटरी पर जाकर वैक्सीन निर्माण की जानकारी ली।

जब वैक्सीन बनकर आया तो सबसे पहले को रोना योद्धाओं को वैक्सीन लगवाया, स्वयं ने लगवाया और पूरे देश भर में मुफ्त वैक्सीनेशन की शुरुआत की। विपक्ष यहाँ भी अपनी घिनौनी चालों से बाज़ नहीं आया और राज्यों ने स्वयं ही वैक्सीनेशन करने की माँग की, उसने भी पूरा अवसर दिया लेकिन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के हाथपैर फूल गए।

तब उसने दुबारा कमान संभाली और दुनिया का सबसे प्रभावी वैक्सीनेशन करके दिखला दिया।

लॉकडाउन, कर्फ्यू ने अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाया, महँगाई भी बढ़ी, बावजूद इसके उसने देश को संभाले रखा है। आलोचना करने वालों को केवल महंगाई दिखती है परंतु उसके पीछे के कारणों को वो गोल कर जाते हैं।

उसने देश की बहुत बड़ी आबादी को मुफ्त राशन देने का भी सबसे प्रभावी कार्यक्रम चलाया, आलोचना इसकी भी बहुत हुई परंतु कहीं न कहीं उसने देश में लूटमार, अपराधों की भी रोकथाम कर दी थी।

राम मंदिर का भूमिपूजन का वो दृश्य देश कभी नहीं भूल सकता जब उसने वहाँ भी साक्षात दंडवत किया था।

उसे भी एक सशक्त जोड़ीदार राम के ही राज्य उत्तरप्रदेश में मिला एक योगी के रूप में, दोनों की जोड़ी की तो राम को भी प्रतीक्षा थी और राम को भी अपने मंदिर निर्माण के लिये सुयोग्य उत्तराधिकारियों की आवश्यकता थी और जब वो मिले तो राम ने भी सारे मार्ग प्रशस्त कर दिये।

प्रभु श्रीराम के जैसे ही महादेव और उनके नंदी को भी प्रतीक्षा थी कि कोई योग्य उत्तराधिकारी आएँ और वो ही उनके भी मंदिर पर लगे एक दाग को धोएँ।

इस जोड़ी ने पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाया और उस दाग को बहुत हद तक ‘छिपा’ दिया। यहाँ भी महादेव प्रकट होने को व्याकुल थे और आखिरकार वो प्रकट हुए।

इसी तरह *प्रभु श्रीकृष्ण भी अपनी बारी की प्रतीक्षा में* हैं और शीघ्र ही वहाँ के द्वार भी खुलेंगे।

हमारे एक वोट ने देश को, हिन्दू समाज को वो दिया है जिसकी कभी हमने कल्पना भी नहीं की थी, कुछ तो पुण्य हमारे भी रहे होंगे जो हम ये सब होते देख रहे हैं और कुछ अभागे आज भी उन्हें कोस रहे हैं जिन्हें खुद ईश्वर ने उत्तराधिकारी चुना है।

पत्थर, झूठे आरोप, गालियाँ उसका गहना है इनसे वो देश और हिंदुत्व का निखार और श्रृंगार करता है उस पर विश्वास रखिये, वो हर दर्द का पक्का इलाज करता है, अधूरे में नहीं छोड़ता है !!

नरेंद्र दामोदरदास मोदी – वो आदमी जिसने *क्रिकेट के दीवाने इस देश में राजनीति को क्रिकेट से भी ज़्यादा दिलचस्प* बना दिया है…

आपसे विनम्र निवेदन है एक बार आत्ममंथन अवश्य कीजियेगा कि हमने राष्ट्र के लिये क्या किया और उस व्यक्ति ने क्या किया उसने सनातन धर्म को ना सिर्फ स्वयं धारण किया अपितु संपूर्ण विश्व में उसके गौरव को बढाया।

जय श्री राम।        भारत माता की जय।    वंदेमातरम्