मौका परस्त राजनीति में तार तार होती नैतिकता*


वो दिन अब लद गये जब राजनीति मूल्यों और नैतिकता पर आधारित होती थी गला काट स्पर्धा में भी नैतिक मूल्यों का ह्वास नही होता था रुपया पैसा खरीद फरोख्त सब चलता था मगर आपसी व्यवहार और देश के प्रति वफादारी निभायी जाती थी। परन्तु आज के परिदृश्य में ये सभी चीजें गौण होती जा रहीं है अपने निजी राजनीतिक फायदे के लिये पार्टी,दल,और धर्म सब बिकाउ हो गये हैं।
राजनीतिक संगठनों के भी आदर्श हुआ करते थे एक विचार धारा होती थी परंतु कुछ समय से अपने राजनीतिक फायदे के लिये ना सिर्फ आदर्शों अपितु देश के हितों की भी बलि चढा दी गई है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को मात देने के लिए देश विरोधी आतंकियों और विरोधी देशों से मिलकर अपने ही घर में आग लगाई जा रही है।इस पर विचार करने की जरूरत है।
ये बात तो नैतिकता की करते हैं और काम अवसरवादिता और भाई भतीजावाद का।भले ही सत्तापक्ष और विपक्ष लाख शुचिता के दावे करें पर इस हमाम में सभी नंगे है वहीं जातिवादिता को भी खुलकर बढावा मिल रहा है हर नेता अपनी औलाद को ही चाहे वो इस लायक हो या ना हो आगे बढाना चाहता है चाटूकारों की तो हर मौसम में पौ बारह होती है कर्तव्य निष्ठा और ईमानदारी गौण हो गयी है राजनीतिक मजबूरी में दागी , घोटाले बाजों को भी खुला प्रश्रय दिया जाता है। रिश्वतखोरी को मूक रुप से समाज द्वारा स्वीकार कर लिया गया है ऐसे समय में नैतिकता और ईमानदारी की बातें गौण लगती है। आजकल एक नया ट्रेंड चला दल बदली कर अपने सभी पापों से छुटकारा पाना। फरीदाबाद में ऐसे नेताओं की कोई कमी नहीं है जो एक दल से दूसरे दल में गुलाटियां मारने के लिये मशहूर हैं ये नेता सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों,पत्थर चोरी ,अवैध खनन कर स्टोन डस्ट चोरी करने के लिये बदनाम हैं और उनका ये अनैतिक धंधा सत्तारुढ़ दल के नेताओं के आशीर्वाद से फल फूल रहा है और जनता को लगता है कि सत्ता में आते ही वो उनके दुख दर्द हर लेंगे। कुकर्मों पर सेवा भाव का फर्जी मुल्लमा चढाने वाले इन कालनेमियों से नैतिकता की उम्मीद व्यर्थ है।
बी डी कौशिक मुख्य संपादक मातृभूमि संदेश न्यूज नेटवर्क
एक राष्ट्रवादी नेता
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