दिल्ली मेट्रो क्यों बन रही है सुसाइड प्वाइंट, 6 महीने में 11 लोगों ने की आत्महत्या

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर की लाइफ लाइन दिल्ली मेट्रो में हर रोज 30 लाख से ज्यादा लोग सफर करते हैं. वहीं, पिछले कुछ वर्षों से दिल्ली मेट्रो आत्महत्या करने वालों के लिए सबसे महफूज जगह बनती जा रही है. ये हम नही आंकड़े बोल रहे हैं. 2019 में पिछले 6 महीने में आत्महत्या करने के 37 मामले सामने आए हैं. जिसमें 11 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 14 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जिन्हें सीआईएसएफ ने बचाया है. जबकि 5 ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने आत्महत्या का इंटेंशन जाहिर किया. जबकि साल 2015 से 2018 के बीच यानि तीन साल में 46 मामले दर्ज हुए थे.

साल 2018 से जून 2019 तक दिल्ली मेट्रो स्टेशन में 28 लोगों की मौत हो चुकी है. डॉ. अनिल पांडेय का कहना है कि CISF ने मेट्रो में सुसाइड को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं. मेट्रो स्टेशन में सीसीटीवी कैमरों से लगातार सभी पर नज़र रखी जाती है. अगर कोई भी आदमी संदिग्ध या फिर रेलवे लाइन की तरफ बार-बार जाने की कोशिश करता है, तो उसे समझा-बुझाकर आत्महत्या करने से रोका जाता है. सादी वर्दी में भी CISF के महिला और पुरुष जवान लोगों पर नजर रखते हैं. पिछले साल 2018 से जून 2019 तक CISF ने 10 लोगों को आत्महत्या करने से रोका. आत्महत्या की कोशिश कर चुके 33 लोगों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया.

दिल्ली मेट्रो स्टेशन को सुसाइड के लिए पहला विकल्प के रूप में चुनने वाले लोगों की मानसिक स्थिति क्या होती है और क्यों ऐसे लोग इतनी दर्दनाक मौत को ही चुनते हैं? इस पर हमने मनोवैज्ञानिक समीर मल्होत्रा से बात की. समीर मल्होत्रा ने दिल्ली मेट्रो में बढ़ रही सुसाइड की घटनाओं पर कहा कि कोई भी आदमी आत्महत्या की कोशिश तभी करता है, जब उस व्यक्ति को दुनिया में अपने लोगों से मदद मिलने की कोई उम्मीद नहीं बचती है. वो बहुत ही ज्यादा निराश होता है.