नरेंद्र मोदी विश्व कूटनीति के चाणक्य बने

ये जो सीने पर मैडल टँगा दिख रहा है तुम्हें….
3 रात पहले इस सम्मान का फर्ज व मित्रता का कर्ज उतार दिया है नरेंद्र मोदी ने….

नई दिल्ली।बी डी कौशिक मुख्य संपादक मातृभूमि संदेश न्यूज नेटवर्क।

   विश्व के सबसे बड़े 2 सैन्य विमान हरक्यूलिस 130 हथियार, गोला बारूद व अन्य तकनीकी उपकरणों के साथ अफगानिस्तान में काबुल सैन्य एयरपोर्ट पर उतार दिए गए हैं….

और इसके साथ ही अफगान आर्मी के हाथ असरफ गनी के मित्र मोदी ने मजबूत कर दिए हैं……

एकाएक अमेरिका की फ़ौज के अफगानिस्तान से हटने के बाद से ही अंदरूनी तरीके से भारत जम्बूद्वीप से खंडित अफगानिस्तान में अपनी दखल बढ़ाने की ओर बढ़ गया था…

ये एक गहरी रणनीति के तहत किया गया है और इसके शीर्ष क्रम में नरेंद्र मोदी की चाणक्य नीति काम कर रही है…
लगभग गुप्त रूप से अफगान आर्मी को भारत की ओर से सैन्य मदद मुहैया कराई जा रही है…

और इसके साथ ही अफगानिस्तान में तालिबान पर कमरतोड़ हमले तेज कर दिए गए हैं….

मोदी अपने सभी पड़ोसी देशों पर अपना संतुलन स्थापित करने का काम शुरू कर चुके हैं और अब वो इस अवसर को भी हथिया चुके हैं कि अफगानिस्तान में भारत अपनी योजनाओं की रक्षा के लिए सैन्य शक्ति को स्थानीय लोगों की रजामंदी से स्थापित करने के लिए तैयार हो गया है….

पर्दे के पीछे मोदी ने बहुत साहस भरा दांव खेला है जो कि अगले एक पखवाड़े के बाद उजागर होगा….

तब तक तालिबान व अफगानिस्तान दोनों ही ओर से मोदी के मनमुताबिक समझौते पर आने की रूपरेखा रच दी जा सकती है…

आज से भारत में संसद का मानसून सत्र शुरू हो गया है और इसके पहले ही भारत ने अफगानिस्तान से मिले हुए सर्वोच्च नागरिक सम्मान#अमीर अमानुल्लाह खान अवार्ड की मित्रता का फर्ज अदा कर दिया है….

मोदी गुजराती हैं और व्यवहार व व्यापार के मामले में गुजराती से बड़ा कूटनीतिक खिलाड़ी और कोई नहीं होता है…..

पहले अमेरिका फ़ौज के समय भारत ने अमेरिका के साथ मिलकर अफगानिस्तान में विकास परियोजनाओं को प्रारंभ किया और अमेरिकी फ़ौज के अफगानिस्तान से जाते ही अपनी परियोजनाओं की रक्षा करने की आड़ में अफगान सरकार की सहायता के लिए सैन्य शक्ति का साथ देने का मार्ग प्रशस्त कर दिया….

अफगानिस्तान के हालात अब लगभग मोदी की चाणक्य नीति पर निर्भर हो गए हैं…
अब संसद मानसून सत्र में मोदी कई ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेंगे…
नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे