हरियाणा सरकार की मुख्य गतिविधियां पढ़िए मातृभूमि संदेश न्यूज के साथ।


चंडीगढ़, 11 नवंबर- बी डी कौशिक मुख्य संपादक मातृभूमि संदेश न्यूज। युवाओं को उद्यमी के तौर पर विकसित कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल आगामी 11 फरवरी को पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती पर रिटेल एक्सपेंशन प्रोजेक्ट का शुभारंभ करेंगे। इसके तहत प्रदेशभर में 2000 रिटेल आउटलेट खोले जाएंगे। प्रदेश सरकार की सोच अंत्योदय की भावना के अनुरूप हरियाणा के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

यह निर्णय आज यहां मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में रिटेल आउटलेट स्थापित करने के संबंध में हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन लिमिटेड की एक बैठक में लिया गया। इस बैठक में कृषि मंत्री श्री जे पी दलाल व सहकारिता मंत्री श्री बनवारी लाल भी उपस्थित थे। बैठक में प्रोजेक्ट को क्रियान्वित करने के लिए ई-टेंडरिंग के माध्यम से आमंत्रित एजेंसी का चयन किया गया।

प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी देते हुए हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री रोहित यादव ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 1500 और शहरी क्षेत्र में 500 रिटेल आउटलेट खोले जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्र में सरकार द्वारा आउटलेट तैयार करके युवाओं को दिए जाएंगे। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए फ्रेंचाइजी पॉलिसी में प्रावधान भी किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इन रिटेल आउटलेट में मुख्यत: रोजमर्रा के उत्पाद व खाद्य पदार्थ रखे जाएंगे। इन आउटलेट में 30 प्रतिशत उत्पाद सरकारी उपक्रमों जैसे हैफेड, वीटा, अमूल, नैफेड, खादी बोर्ड, स्वयं सहायता समूह और किसान उत्पादक संगठन इत्यादि के रखे जाएंगे। इसके अलावा, 30 प्रतिशत उत्पाद हरियाणा व आस-पास के क्षेत्र के लघु, मध्यम एवं सूक्ष्म उद्योगों द्वारा तैयार उत्पाद रखे जाएंगे। साथ ही, 40 प्रतिशत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ब्रांड के भी उत्पाद रखे जाएंगे। इन आउटलेट पर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद ही रखे जाएंगे।

उन्होंने बताया कि इन आउटलेट को स्थापित करने के लिए निजी क्षेत्र की सर्वोत्तम प्रथाएं जैसे लॉजिस्टिक व आपूर्ति श्रंखला प्रबंधन को शामिल किया जाएगा, जिससे सभी आउटलेट पर एक समान उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। केंद्रीयकृत आईटी प्रणाली के तहत शत-प्रतिशत कंप्यूटर ऑपरेटिड आउटलेट होंगे। लेन-देन ई-बिल के माध्यम से पारदर्शी तरीके से होगा। आउटलेट के संचालन के लिए युवाओं को सरकार द्वारा प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य उत्पादक, दुकानदार और ग्राहकों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाना है।

उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन के लिए हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अंतर्गत एक अलग डिवीजन स्थापित किया गया है और इसमें ऐसे विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, जिन्हें इस तरह के प्रोजेक्ट को संचालित करने का लंबा अनुभव है।

बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री देवेंद्र सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री वी. उमाशंकर, विकास एवं पंचायत विभाग के प्रधान सचिव श्री सुधीर राजपाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

चंडीगढ़, 11 नवंबर-। बी डी कौशिक मुख्य संपादक मातृभूमि संदेश न्यूज। हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी उपायुक्तों को 15 दिसंबर, 2020 तक कलेक्टर दरों की प्रारूप सूची प्रकाशित करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर दरों का अंतिम प्रकाशन मार्च, 2021 तक किया जाएगा।

राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्त आयुक्त श्री संजीव कौशल ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सभी मंडल आयुक्तों और उपायुक्तों को सम्बंधित जिलों में प्रत्येक तहसील में कॉलोनी या क्षेत्र के लिए कलेक्टर दर तय करने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं ।

दिशा-निर्देशों के अनुसार तहसील और उप-तहसील में प्रत्येक कॉलोनी या क्षेत्र के कलेक्टर दरों का आंकलन करने के लिए एक समिति बनाई जाएगी। समिति गैर-सरकारी लोगों से परामर्श लेगी जो संबंधित क्षेत्रों में संपत्ति की बाजार दरों के बारे में जानकारी रखते हों। समिति सर्वे करेगी और प्रत्येक क्षेत्र में पिछले 12 महीनों में किए गए रजिस्ट्रेशनों की भी जांच करेगी और कलेक्टर दरों की एक तर्कसंगत गणना करेंगे।

उपायुक्त किसी वरिष्ठ अधिकारी को जिला नोडल अधिकारी नामित कर सकते हैं। यह अधिकारी सभी तहसील-स्तरीय समितियों द्वारा मूल्यांकन की गई दरों को एकत्र करने और सभी क्षेत्रों के कलेक्टर दरों का प्रस्ताव उपायुक्तों को देने के लिए जिम्मेदार होगा।

कलेक्टर दरों की प्रारूप सूची के प्रकाशन के बाद आपत्तियों एवं शिकायतों के लिए 30 दिनों की अवधि या 15 जनवरी, 2021 तक का समय आरक्षित रखा जाएगा। इसके लिए 15 दिसंबर तक एक पोर्टल विकसित किया जाएगा। 15 जनवरी से 15 फरवरी,2021 तक के 30 दिनों की अवधि में आपत्तियों एवं शिकायतों को सुना और निवारण कियाजाएगा। इसके बाद प्रत्येक जिले के लिए कलेक्टर दरों के प्रारूप की राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग की जाएगी।

श्री कौशल ने कहा कि अधिकारी पूरी प्रक्रिया के दौरान व्यापक प्रचार सुनिश्चित करेंगे ताकि राज्य के लोग जागरूक हों और सर्वेक्षण चरण और आपत्तियां प्राप्त करने की अवधि के दौरान बेहतर जानकारी दे सकें। अगले साल से, कलेक्टर दरों को अंतिम रूप दिया जाएगा, जो आगामी वर्ष की 1 जनवरी से प्रभावी मानी जाएंगी।

चण्डीगढ़, 11 नवंबर- बी डी कौशिक मुख्य संपादक मातृभूमि संदेश न्यूज। हरियाणा के खेल एवं युवा मामले राज्य मंत्री सरदार संदीप सिंह ने कहा है कि खेलो इंडिया-2021 गेम्स में भाग लेने वाले खिलाडिय़ों की वास्तविक आयु जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से सभी जिलों में ‘बोन डेंसटी टेस्ट’ की व्यवस्था करवाई जायेगी ताकि ओवर ऐज संबंधित किसी प्रकार की शिकायतें प्राप्त न हों । इसके अलावा, खेलो इंडिया-2021 गेम्स के सफल आयोजन के लिए विभिन्न विभागों को आपसी तालमेल सुनिश्चित कर कार्य करना होगा। जिसके लिए उच्च स्तरीय कमेटियों का गठन किया जाएगा।

सरदार संदीप सिंह ने इस संबंध में खेल विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में खेल एवं युवा मामले विभाग के प्रधान सचिव श्री योगेंद्र चौधरी, मुख्यमंत्री की उप-प्रधान सचिव श्रीमती आशिमा बराड एवं खेल एवं युवा मामले विभाग के निदेशक श्री एस एस फुलिया के अलावा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

बैठक में राज्य मंत्री ने खेलों के लिए आवश्यक खेल संरचनाओं की उपलब्धता एवं आवश्यकता की सूचियां तैयार करने, प्रमुख आयोजन स्थलों पर खिलाडिय़ों के लिए उच्च स्तरीय जिम स्थापित करने, स्कोर बोर्ड संचालन करने की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए। सरदार संदीप सिंह ने कहा कि प्रतिभागियों के रहने की उचित व्यवस्था करना बहुत ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हॉकी जैसी कुछ खेलों का आयोजन चण्डीगढ़ में भी किया जा सकता है, जिसके लिए खेल विभाग ट्राई सिटी के खेल इंफ्रास्टक्चर व रहने की व्यवस्था की जियो-मैपिंग जल्द करवाई जाए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खिलाडियों के लिए सर्वागीण विकास के लिए कार्य कर रही है। ताकि खिलाड़ी राष्ट्र एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने देश का नाम रोशन कर सकें। उन्होंने विभाग द्वारा स्थापित किए जा रहे रिहेबिलिटेशन केंद्रों की स्थापना में तेजी लाने के साथ-साथ वहां पर विशेषज्ञ फिजीयोथेरेपिस्ट, मनोवैज्ञानिक एवं मनोविशेषज्ञ नियुक्त करने के भी निर्देश दिये ताकि खिलाडियों को इनकी देखरेख में प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके।

चण्डीगढ़, 11 नवम्बर-बी डी कौशिक मुख्य संपादक मातृभूमि संदेश न्यूज। हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (हरेरा), गुरुग्राम के अध्यक्ष डा० के.के.खण्डेलवाल ने कहा है कि योजना, विनिर्देशों और समय सीमा से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं करवाना रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 का उल्लंघन माना जाएगा और ऐसा करने वाले प्रमोटर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह जानकारी हरेरा बैंच की गत दिवस हुई एक बैठक में दी गई, जिसमें हरेरा के अध्यक्ष डॉ० खण्डेलवाल के अतिरिक्त हरेरा सदस्य श्री एस.सी. कुश और श्री समीर कुमार भी उपस्थित थे।

उन्होंने कहा कि प्राधिकरण के पास बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें दर्ज की जा रही हैं, जिनमें प्रमोटर्स द्वारा आबंटियों के साथ अुनचित एवं दुव्र्यवहार करने से सम्बन्धित गम्भीर आरोप लगाए गये हैं। यह देखा गया है कि जब कभी आवंटी प्रमोटर या उनके प्रतिनिधियों से संपर्क करते हैं तो उन्हें जानकारी नहीं दी जाती और यदि दी जाती है तो वह अधूरी होती है। आवंटियों को साइट पर जाने का अधिकार है और वे स्वयं निर्माण की गुणवत्ता की जांच कर सकते हैं। लेकिन, लगातार अनुरोध करने के बाबजूद ऐसा कोई अवसर आवंटी को नहीं दिया जाता है और जब कभी आवंटी साइट पर जाते हैं तो प्रमोटर्स के सुरक्षा गार्ड न केवल उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं, बल्कि कई बार उनके साथ दुव्र्यवहार भी करते हैं। आवंटियों के साथ किया गया यह व्यवहार न केवल अवैध एवं आपत्तिजनक है, बल्कि शालीनता के खिलाफ भी है।

इसके अतिरिक्त, प्रमोटर का कस्टमर रिलेशन मैनेजमैंट विभाग भी सही और स्वागत योग्य तरीके से जवाब नहीं देता है। विभाग की प्रतिक्रिया कई बार पूरी तरह से नकारात्मक होती है और आवंटियों को न केवल असुविधा का सामना करना पड़ता है, बल्कि मानसिक पीड़ा से भी गुजरना पड़ता है। प्राधिकरण ने अपनी कार्यवाही के दौरान यह भी पाया है कि प्रमोटर के प्रतिनिधि आवंटी को धमकी भरे ढंग से फटकार एवं डांट लगाते हैं। इस प्रकार का द्वेषभाव स्पष्ट दिखाई देता है और रियल एस्टेट, जो वर्तमान में उपभोक्ता की कम मांग और विश्वास के कारण नाजुक चरण से गुजर रहा है, के विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इस पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

ग्राहकों के साथ बुरा-व्यवहार, अधिनियम में दिए गये उनके अधिकारों से उन्हें वंचित करना और आवंटी को अपेक्षित जानकारी उपलब्ध न करवाया जाना रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 का उल्लंघन माना जाएगा और प्रमोटर को सख्त कार्रवाई और दण्ड का सामना करना होगा।

प्रमोटर की इस तरह की लापरवाही और ढीले रवैये पर संज्ञान लेते हुए प्राधिकरण ने दो प्रतिष्ठित प्रमोटर्स नामत: ईएमएएआर और जेएमडी को अपने कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमैंट विभाग को प्रशिक्षण प्रदान करने के निर्देश दिए हैं ताकि आवंटियों के साथ सम्मान और अनुग्रह के साथ व्यवहार किया जाए। चूंकि ये आवंटी ही हैं, जो अपनी मेहनत की कमाई को परियोजना की इकाइयों को खरीदने में लगाते हैं और बदले में प्रमोटर को बेचने और मुनाफा कमाने में मदद करते हैं।

हरेरा, गुरुग्राम रेरा अधिनियम के प्रावधानों के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए आवंटियों /ग्राहकों के साथ व्यवहार करने के संबंध में प्रमोटरों और उनके कर्मचारियों के लिए एक आचार संहिता को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा ग्राहक को भगवान बताया गया है, ऐसी ही भावना रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रबल होनी चाहिए। प्राधिकरण प्रमोटर्स और उनके कर्मचारियों को अधिनियम में प्रदत्त आवंटियों के अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के बारे में शिक्षित करने के लिए कार्यशाला भी आयोजित करेगा। आवंटियों को उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों और प्रमोटर के प्रति उनके दायित्वों के बारे में भी अवगत कराया जाएगा। इस तरह की जागरूकता से मिलेनियम सिटी, जो कि आवासीय, वाणिज्यिक, साइबर आईटी और औद्योगिक परिसरों के भावी गंतव्य के रूप में जानी जाती है, में रियल एस्टेट क्षेत्र के विकास में मदद मिलेगी।

इससे पूर्व, एक निष्पादन याचिका में रियल एस्टेट क्षेत्र के प्रमुख खिलाड़ी नामत: मैसर्ज ईएमएएआर एमजीएफ लिमिटेड के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई थी, जिसके बाद प्रमोटर द्वारा लगभग दो करोड़ रुपये की डिक्री दी गई।

विभिन्न प्रमोटर्स से संबंधित लगभग 35 मामलों में, एक आदेश पारित किया गया है ताकि शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए मध्यस्थता के संबंध में प्राधिकरण के आदेशों के अनुपालन में मध्यस्थता केंद्र के समक्ष उपस्थित होने के लिए पार्टियों को निर्देश दिये जा सके। निपटान राशि लगभग 150 करोड़ रुपये हो सकती है।

अधिनियम की धारा 35 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्राधिकरण ने मैसर्स विपुल लिमिटेड के खिलाफ एक जांच आयुक्त नियुक्त किया है ताकि उन परिस्थितियों के बारे में पूछताछ की जा सके, जिनके तहत वैधानिक प्रावधान के अनुसार समय पर कब्जा नहीं दिया गया था और साथ ही आवेदन करने के साथ-साथ आवेदन प्राप्त करने की तिथि पर कब्जा प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आवश्यक विकास कार्यों की कमी की जांच की जा सके। इस संबंध में प्राधिकरण ने प्रमोटर के खिलाफ मुकदमा चलाने की कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है।

इसी प्रकार, दायर शिकायत के जवाब को दाखिल करने में गैर-जरूरी देरी के लिए मैसर्ज वाटिका लिमिटेड और मैसर्ज अंजली प्रमोटर्स एंड डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भारी जुर्माना लगाया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि रेरा के कार्यान्वयन ने भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र की गतिशीलता को बदल दिया है, जिससे खरीदारों और निवेशकों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। अधिनियम डेवलपर्स और उपभोक्ताओं, दोनों में सकारात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न करने में सक्षम है।

चंडीगढ़, 11 नवंबर- बी डी कौशिक मुख्य संपादक मातृभूमि संदेश न्यूज। हरियाणा सरकार ने ‘राज्य शिक्षक पुरस्कार-2020’ के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 नवंबर 2020 करने का निर्णय लिया है, पहले यह तिथि 2 नवंबर 2020 निर्धारित की गई थी।

हरियाणा के स्कूल शिक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पात्र शिक्षकों को आवेदन करने के लिए विभाग की वैबसाइट schooleducationharyana.gov.in पर लॉग-इन करके ‘ऑनलाइन एप्लीकेशन’ शीर्षक के अंतर्गत दर्शाए गए ‘स्टेट अवार्ड-2020’ नामक लिंक पर क्लिक करना होगा। इसके बाद, विभाग द्वारा जारी की गई अवार्ड-पॉलिसी का विश्लेषण करके निर्धारित मापदंडों को अपनाते हुए तथा आवेदन में मांगी गई सभी जानकारियां देते हुए शिक्षक को वांछित दस्तावेज अपलोड करने होंगे।

उन्होंने बताया कि हरियाणा के सरकारी स्कूलों में सेवारत अध्यापक अब 15 नवंबर 2020 तक ‘राज्य शिक्षक पुरस्कार-2020’ के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

चंडीगढ़, 11 नवम्बर- बी डी कौशिक मुख्य संपादक मातृभूमि संदेश न्यूज। हरियाणा की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले ग्लोबल सिटी गुरुग्राम को विश्व के मानचित्र पर उभारने की एक और पहल करते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने गुरुग्राम को देश का स्मार्टेस्ट सिटी बनाने की घोषणा की है। इस कड़ी में उन्होंने मानेसर में अलग से नया नगर निगम बनाने तथा इस क्षेत्र में न्यू गुरुग्राम शहर विकसित करने के प्रस्ताव का सुझाव दिया।

मुख्यमंत्री आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से गुरुग्राम में प्रोजेक्ट एयर केयर व गुरुग्राम-महरौली रोड पर गुरुग्राम के प्रवेश मार्ग के सौंदर्यकरण की दो परियोजनाओं के लोकार्पण अवसर पर बोल रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में गुरुग्राम व फरीदाबाद महानगर होने के नाते यहां दोनों शहरों के लिए अलग से महानगर विकास प्राधिकरण पहले ही गठित किए जा चुके हैं। इन शहरों में वायु प्रदूषण हम सब के लिए एक चिंता का विषय है और इसी को देखते हुए वायु को साफ करने के लिए आज दो प्रोजेक्ट एयर केयर योजनाओं की शुरुआत की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुग्राम व फरीदाबाद के साथ-साथ करनाल को भी स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल किया गया है। इन शहरों में स्मार्ट मानदण्डों के अनुरूप जल प्रबंधन, सुरक्षा प्रणाली, सार्वजनिक परिवहन व भवन, सुशासन, ई-एजुकेशन, टेली मेडिसन जैसी सुवधिाएं विकसित करने की आवश्यकता है और इसी के अनुरूप इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज लोकार्पित की गई ये दो महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी इसी कड़ी का हिस्सा हैं।

गुरुग्राम के लोगों को इन दो परियोजनाओं के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं दीपावली के उपहार स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम के लोगों को त्वरित प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध करवाने के दृष्टिगत यहां पर लगभग 180 करोड़ रुपये की लगात से टॉवर ऑफ जस्टिस का निर्माण भी करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यहां का लोक निर्माण विभाग का विश्राम गृह स्टेट ऑफ आर्ट के नाम से जाना जाता है जो इस शहर का गौरव भी है।

बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव श्री डी.एस.ढेसी भी उपस्थित थे।

चंडीगढ़, 11 नवंबर- बी डी कौशिक मुख्य संपादक मातृभूमि संदेश न्यूज। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय,हिसार के कृषि वैज्ञानिकों ने पशुओं के चारे की फसल ज्वार की नई व उन्नत किस्म ‘सीएसवी 44 एफ’ विकसित कर विश्वविद्यालय के नाम एक और उपलब्धि दर्ज करवा दी है। ज्वार की इस किस्म को विश्वविद्यालय के अनुवांशिकी एवं पौध प्रजनन विभाग के चारा अनुभाग द्वारा विकसित किया गया है। इस किस्म को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि एवं सहयोग विभाग की ‘फसल मानक, अधिसूचना एवं अनुमोदन केंद्रीय उप-समिति’ द्वारा नई दिल्ली में आयोजित 84वीं बैठक में अधिसूचित व जारी कर दिया गया है। बैठक की अध्यक्षता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के फसल विज्ञान के उप-महानिदेशक डॉ. टी.आर. शर्मा ने की थी। ज्वार की यह किस्म दक्षिणी राज्यों मुख्यत: कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के लिए सिफारिश की गई है। हालांकि इस किस्म को विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एचएयू में ही विकसित किया है।

विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. एस.के. सहरावत ने बताया कि ‘सीएसवी 44 एफ’ किस्म में अन्य किस्मों की तुलना में प्रोटीन व पाचनशीलता अधिक है, जिसकी वजह से यह पशु के दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी करती है। इस किस्म में मिठास 10 प्रतिशत से भी अधिक व स्वादिष्ट होने के कारण पशु इसे खाना काफी पसंद करते हैं। इस किस्म में हरे चारे के लिए प्रसिद्ध किस्म ‘सीएसवी 21 एफ’ से 7.5 प्रतिशत व ‘सीएसवी 30 एफ’ से 5.8 प्रतिशत अधिक हरे चारे की पैदावार होने के कारण किसानों को अधिक मुनाफा भी होगा। सिफारिश किए गए उचित खाद व सिचाई प्रबंधन के अनुसार यह किस्म अधिक पैदावार देने में सक्षम है और इसे लवणीय भूमि में भी उगाया जा सकता है। अधिक बारिश व तेज हवा चलने पर भी यह किस्म गिरती नहीं है। ज्वार में प्राकृतिक तौर पर पाया जाने वाला विषैला तत्व धूरिन इस किस्म में बहुत ही कम है। ‘सीएसवी 44 एफ’ किस्म तनाछेदक कीट की प्रतिरोधी है व इसमें पत्तों पर लगने वाले रोग भी नहीं लगते।

विश्वविद्यालय के आनुवांशिकी एवं पौध प्रजनन विभाग के अध्यक्ष डॉ. ए.के. छाबड़ा ने बताया कि ‘सीएसवी 44 एफ’ किस्म को विकसित करने में इस विभाग के चारा अनुभाग के वैज्ञानिकों डॉ. पम्मी कुमारी, डॉ. सत्यवान आर्य, डॉ. एस.के. पाहुजा, डॉ. एन.के. ठकराल एवं डॉ. डी.एस. फोगाट की टीम की मेहनत रंग लाई है। इसके अलावा डॉ. सतपाल, डॉ. जयंती टोकस, डॉ. हरीश कुमार, डॉ. विनोद मलिक एवं डॉ. सरिता देवी का भी विशेष सहयोग रहा है।

नई किस्म को विकसित करने वाली टीम सदस्य डॉ. डी.एस. फोगाट ने बताया कि हालांकि इस किस्म को एचएयू में ही विकसित किया गया है, लेकिन कमेटी द्वारा इसकी गुणवत्ता व पैदावार को ध्यान में रखते हुए अभी देश के दक्षिणी राज्यों (तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक) में हरे चारे की उत्तम पैदावार के लिए सिफारिश किया गया है। इस किस्म को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में परीक्षण के तौर पर लगाया गया था, जहां इसके बहुत ही सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इसलिए यहां किसानों के लिए भी इसकी सिफारिश संबंधी प्रपोजल जल्द ही कमेटी को भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि चारा अनुभाग 1970 से अब तक ज्वार की कुल आठ किस्में विकसित कर चुका है। इनमें से बहु-कटाई वाली किस्म एसएसजी 59-3 (1978), दो कटाई वाली किस्म एचसी 136 (1982) व एक कटाई वाली किस्में एचसी 308 (1996), एचजे 513 (2010) और एचजे 541 (2014) किसानों की पहली पसंद बनी है।